हर बार होसला करते हैं , फिर खुद ही टूट जाते हैं
इस दिल को खुद ही समझा कर , इस दिल से हार जाते हैं
फिर से रेत को मुठी में पकड़ का र ,फिसलता पाते हैं
आँखों में समंदर को समेटते समेटते , छलकता पाते हैं
हर बार कुछ चाह कर , वह खुद ही कर जाते हैं
इंतज़ार करवाते करवाते , खुद ही इंतज़ार करता पाते हैं
न जाने क्यों इस दिल को , समझा ही नही पाते हैं
अपने आप खुद को मना ही नहीं पाते हैं
वह क्या समझेंगे जस्बात जिन्हें 'एहसास' ही नही
न जाने क्यों हर बार कुछ ऐसे ही दोस्त बना जाते हैं
Thursday, November 22, 2007
Thursday, November 15, 2007
zeevan ek imthaan
जीवन एक बहती नदिया है
और उस नदिया के कई किनारे हैं
ज़िंदगी मे कितने किनारे है, हम सोच नही पाते
किस किनारे का कौन माज्ही है, कह नही पाते
किनारे पे पौचना है नही आसान काम
इसलिए हर किनारा है एक इम्तहान
ज़िंदगी के सफर में वह होते है असफल
बार बार सोचते हैं जो
इम्तहान होगा फिर से अगली बार
सफलता और असफलता इस इम्तहान के हैं दो पहलू
स्प्प्लेमेंट के लिए नही है जगह फालतू
साहसी वीर होते हैं सफलता से गौरान्वित
होते हैं कायर असफलता से कलंकित
ज़िंदगी से जूझकर पार हो जाना है साहासियों का काम
नही है कायरों का यहाँ कोई स्थान
कायरता मनुष्य को कमजोर बानाती है
फलत हर इम्तहान में फ़ैल करवाती है
रट्टू और कायर में नही है ज्यादा अंतर
दोनो ही फ़ेल होने में अव्वल
ज़िंदगी के इम्तहान का स्य्ल्लाबुस नही होता
इसलिए रट्टू इसमे पास नही होता
साहसी वीरों के हैं ये लक्षण, विवेकशील,
धर्य, स्वाभिमान और अथक परिश्रम
जहाँ रटू होते हैं अविवेकशील, वहीं
कायर होते हैं अपरिश्रामी और अधीर
असफलता है इनके चरण चूमती, क्योंकि
सफलता हमेशा आशंकित ही रहती
ज़िंदगी के इस इम्तहान को कायर कर नही सकते पास
तुम वीर बनकर रचो एक नया इतहास
डरना इम्तहान से नही है वीरों का काम
इम्तहान को चीर दे वही है सच्चा वीर महान
इम्तहान से न तुम कत्राओ
पास फ़ैल होने के दर से न तुम घबराओ
ज़िंदगी को जियो वीरों कि तरह
यही सबक सबको सिखलाओ
- राजेश
और उस नदिया के कई किनारे हैं
ज़िंदगी मे कितने किनारे है, हम सोच नही पाते
किस किनारे का कौन माज्ही है, कह नही पाते
किनारे पे पौचना है नही आसान काम
इसलिए हर किनारा है एक इम्तहान
ज़िंदगी के सफर में वह होते है असफल
बार बार सोचते हैं जो
इम्तहान होगा फिर से अगली बार
सफलता और असफलता इस इम्तहान के हैं दो पहलू
स्प्प्लेमेंट के लिए नही है जगह फालतू
साहसी वीर होते हैं सफलता से गौरान्वित
होते हैं कायर असफलता से कलंकित
ज़िंदगी से जूझकर पार हो जाना है साहासियों का काम
नही है कायरों का यहाँ कोई स्थान
कायरता मनुष्य को कमजोर बानाती है
फलत हर इम्तहान में फ़ैल करवाती है
रट्टू और कायर में नही है ज्यादा अंतर
दोनो ही फ़ेल होने में अव्वल
ज़िंदगी के इम्तहान का स्य्ल्लाबुस नही होता
इसलिए रट्टू इसमे पास नही होता
साहसी वीरों के हैं ये लक्षण, विवेकशील,
धर्य, स्वाभिमान और अथक परिश्रम
जहाँ रटू होते हैं अविवेकशील, वहीं
कायर होते हैं अपरिश्रामी और अधीर
असफलता है इनके चरण चूमती, क्योंकि
सफलता हमेशा आशंकित ही रहती
ज़िंदगी के इस इम्तहान को कायर कर नही सकते पास
तुम वीर बनकर रचो एक नया इतहास
डरना इम्तहान से नही है वीरों का काम
इम्तहान को चीर दे वही है सच्चा वीर महान
इम्तहान से न तुम कत्राओ
पास फ़ैल होने के दर से न तुम घबराओ
ज़िंदगी को जियो वीरों कि तरह
यही सबक सबको सिखलाओ
- राजेश
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